पांच पाप | Five Sins | बाल बोध | जैन कहानियाँ | Jain Story
Muni Pramansagar Ji
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यदि हम अपने बच्चों से वास्तव में प्रेम करते हैं और उनका कल्याण चाहते हैं तो अच्छी शिक्षा के साथ साथ उन्हें अच्छे संस्कार भी देने होंगे, पापों से दूर रहना भी सिखाना होगा । कोई भी माता या पिता नही चाहेगा की उनका बच्चा हिंसा करे, झूठ बोले या फिर चोरी करे। इन पापों का भय और इनसे बचने के संस्कार हमें बचपन से ही बच्चों को देने होंगे - लेकिन कैसे? प्यार से समझा कर और एक मज़ेदार कहानी के ज़रिए । जिसे वो फिर कभी ना भूलें ।











